क्षीर सागर बना रामबाग पोखरा, हुई आकाशवाणी

Updated on: 06 December, 2019 05:54 AM

अनंत चतुर्दशी की तिथि। रात के आठ बज चुके हैं। रामनगर स्थित दुर्गामंदिर के सामने विशाल पोखरे की पश्चिमी और दक्षिणी सीढ़ियां नर-नारियों और बच्चों की भीड़ से खचाखच भरी चुकी है। शेषशैया पर रोशनी के नाम पर भाद्रपद की चतुर्दशी की रात चांदनी और दूर से नजर आ रहे चिनियाबदाम के खोमचों पर जलती ढिबरियां टिमटिमा रही है।

क्षीर सागर में परिवर्तित रामबाग पोखरे में प्रभु की झांकी के आसपास दो पंचलाइटें जरूर जल रही हैं।सभी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा में बैठे हैं। लग ही नहीं रहा कि सैकड़ों की भीड़ जमा है। न कोई शोर न कोई हलचल। इतनी भीड़ के बाद भी सिर्फ लोगों के फुसफुसाने जैसी आवाजें ही आ रही हैं। अचानक व्यास लक्ष्मीनारायण के पुत्र हृदयनारायण पांडेय ने आवाज लगाई है-चुप रहो...सावधान...! उनका इतना कहना था कि जो फुसफुसाहट दूर से आती महसूस हो रही थी, वह भी बंद हो गई। हवा बहने से आसपास के पेड़ों की पत्तियों से उत्पन्न लयात्मक ध्वनि प्राकृतिक संगीत की अनुभूति करा रही है। लीला प्रेमी सचेत हो गए हैं। जो जहां बैठा था उसी जगह खड़ा हो गया है। रास्ते की विपरीत दिशा में बैठे लोगों को भी पता चल गया है कि राजपरिवार के प्रतिनिधि का आगमन हो चुका है। देखा-देखी बाकी के लोग भी खड़े होने लगे हैं।वातावरण में एक बार फिर हर-हर महादेव का जयघोष गुंजायमान हो रहा है। राजपरिवार के प्रतिनिधि अनंत नारायण लीलाप्रेमियों का अभिवादन स्वीकार कर रहे हैं। पोखरे के दक्षिणी छोर पर बनी बारादरी में ढोलक थाप, झांझ की झनकार और मंजीरे की खनक एक साथ कानों तक पहुंच रही है। गान के साथ ही आकाशवाणी की लीला आरंभ हो चुकी है। बारादरी में गाए जा रहे दोहों और चौपाइयों का हर लफ्ज पोखरे के दूसरे छोर तक साफ सुनाई दे रहा है। अगले 21 मिनट तक यही क्रम गतिमान रहने के बाद रात्रि ठीक 8.22 बजे एक बार फिर सावधान...सावधान...सावधान... की लंबी तान वाली आवाज सुनाई देने लगी है। इसके माध्यम से संकेत पाते ही पोखरे के पश्चिमी छोर से शेषनाग रूपी नौका लेकर प्रतीक्षारत नाविक पोखरे के बीच वाले हिस्से की ओर बढ़ने लगे हैं। शेष की शैया पर विराजमान भगवान विष्णु जैसे-जैसे पोखरे के मध्य पहुंच रहे हैं जनमानस में सीताराम-सीता राम का संकीर्तन मुखर होता जा रहा है। नौका के मध्य तक आते-आते संकीर्तन में ओज मिश्रित प्रसन्नता के भाव स्पष्ट हो रहे हैं। पदों के गान के बीच क्षीर सागर में शेषनाग की शैया पर लेटे भगवान विष्णु के चरण माता लक्ष्मी दबा रही हैं। इस दृश्य का अवलोकन कर नर-नारी विभोर होकर लक्ष्मी नारायण की झांकी को प्रणाम कर रहे हैं। इसी बीच आकाशवाणी गूंजी मानव के कल्याण और असुरों के संहार के लिए में रघुकुल में राम के रूप में जन्म लूंगा...।लीला एक नजर मेंशाम 04:19 बजे- गंगा तट सिथत प्राचीन धर्मशाला से लक्ष्मी-नारायण के स्वरूप लीला स्थल के लिए रवानाशाम 04:24 बजे-रामनगर किले के सामने खड़ी बग्घी पर लक्ष्मी-नारायण के स्वरूप कराए गए विराजमानशाम 04:38 बजे-काशीराज परिवार के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह की शाही बग्घी मोटरखाने में सज कर हो गई है तैयारशाम 04:55 बजे- अपनी बग्घी पर सवार हो अनंत नारायण सिंह किले से निकले लीला स्थल के लिएशाम 05:19 बजे-शाही काफिला पूरी शानों शौकत के साथ पहुंचा रामबाग स्थिल लीला स्थल परशाम 05:25 बजे-36वीं वाहिनी पीएसी के जवानों की टुकड़ी ने अनंत नारायण सिंह को दिया गार्ड ऑफ ऑनरशाम 05:29 बजे- रामबाग के बाहरी प्रांगण में श्रीरामलीला का औपचारिक श्रीगणेश रावण जन्म की लीला से हुआ

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