स्वामी चिन्मयानंद केस: रंगदारी मांगने की आरोपी छात्रा को SIT ने घर से किया गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

Updated on: 20 October, 2019 02:28 AM

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता चिन्मयानंद पर बलात्कार और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली 23 साल की कानून की छात्रा को आज विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के मामले में लोकल पुलिस के साथ उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने उस छात्रा को कोर्ट के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने छात्रा को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक नवीन अरोड़ा ने यहां बताया कि छात्रा से मंगलवार को पूछताछ की गई थी। पुख्ता सूबत मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर मेडिकल जांच कराई जा रही है। मेडिकल जांच के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। इसके बाद कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया है।

उन्होंने बताया कि चिन्मयानंद को ब्लैकमेल कर पांच करोड़ मांगने के मामले में तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है ।उनमें संजय और विक्रम ने स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने चिन्मयानंद से पांच करोड़ रूपए मांगे थे । दूसरी ओर युवती ने ब्लैकमेलिंग और जबरन उगाही के मामले में शामिल होने के पुख्ता सूबत मिले हैं।

जमानत पर 26 सितंबर को होने है सुनवाई

मंगलवार को एक स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने विचारार्थ स्वीकार कर लिया। इस पर 26 सितंबर को सुनवाई होगी। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली कानून की छात्र को एसआईटी (विशेष जांच दल) ने कथित तौर पर रंगदारी वसूलने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। छात्रा के वकील अनूप त्रिवेदी ने पत्रकारों को बताया था कि एडीजे सुधीर कुमार की अदालत ने स्वामी चिन्मयानंद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली छात्रा की अग्रिम जमानत याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली। अदालत ने इस मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड 26 सितंबर को तलब किए हैं। त्रिवेदी ने कहा कि यह राहत की बात है कि अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली है और सामान्यत: ऐसे मामलों में गिरफ्तारी नहीं होती है।

इस बीच, छात्रा को अदालत से उसके घर छोड़ने पहुंची एसआईटी ने लड़की से उसके घर पर देर शाम तीन घंटे तक पूछताछ की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ करने वाली टीम में दो महिला अधिकारियों के अलावा सात लोग थे। एसआईटी ने छात्रा से किन बिंदुओं पर पूछताछ की, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई।

इससे पहले छात्रा ने हाईकोर्ट में प्रार्थना की थी कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। इस पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और कहा था कि लड़की अगर राहत चाहती है तो वह उचित पीठ के समक्ष नई याचिका दायर कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा था कि पीठ इस मामले में केवल जांच की निगरानी करने के लिए नामित की गई है और गिरफ्तारी के मामले में कोई आदेश पारित करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसी मामले को लेकर आज छात्रा ई रिक्शा से अपने भाई और पिता के साथ बैठकर न्यायालय आ रही थी कि तभी एसआईटी को सूचना मिल गई। वहां पहुंची एसआईटी को लड़की ने बताया कि वह अदालत में हस्ताक्षर करने जा रही है। इसके बाद एसआईटी उसे लेकर अदालत पहुंची जहां छात्रा ने अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की ।


छात्रा के वकील ने पत्रकारों को बताया कि अग्रिम जमानत याचिका अपर जिला न्यायाधीश (प्रथम) सुधीर कुमार की अदालत में दायर की गई जिसे विचारार्थ स्वीकार कर लिया गया। अदालत ने इस मामले में कोई निर्णय न देकर मामले में 26 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है तथा यह भी कहा है कि 26 तारीख को ही सारे साक्ष्य के साथ सुनवाई होगी ।

त्रिवेदी ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने अफवाह उड़ाई कि छात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि न्यायालय द्वारा उसकी अर्जी विचारार्थ स्वीकार करना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है। एसआईटी उसे उसके आवास तक छोड़ने गई।

स्वामी चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में एसआईटी ने विक्रम, सचिन तथा संजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसी मामले में जिस मोबाइल से चिन्मयानंद को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया था, उस मोबाइल को विक्रम और सचिन ने राजस्थान में झाड़ियों में फेंक दिया था। आज इसी मामले में एसआईटी विक्रम और सचिन को रिमांड पर लेकर मोबाइल का पता लगाने जयपुर गई है ।

इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चिन्मयानंद की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी। चिन्मयानंद को विधि छात्रा द्वारा बलात्कार का आरोप लगाए जाने के बाद एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने मंगलवार को बताया कि उनकी जमानत याचिका को अदालत ने यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि यह अर्जी सत्र अदालत में लगाई जानी चाहिए। अदालत ने भाजपा नेता से वसूली मांगने के मामले में तीन आरोपियों संजय, सचिन और विक्रम की जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी।


एसआईटी सूत्रों ने बताया एसआईटी ने तीन युवकों में से दो को 95 घंटे के लिए रिमांड पर लिया था। एसआईटी इन दो युवकों को रंगदारी की मांग में इस्तेमाल हुए मोबाइल फोन की बरामदगी वाली जगह पर ले जाना चाहती थी। दोनों युवकों ने एसआईटी को बताया कि उन्होंने फोन को राजस्थान में मेहंदीपुर बालाजी के पास फेंक दिया था।

सूत्रों ने बताया कि एसआईटी ने ओम सिंह के मोबाइल की भी पड़ताल की जिस पर रंगदारी की रकम मांगने के लिए मैसेज भेजा गया था। गौरतलब है कि एलएलएम की पढ़ाई कर रही छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो वायरल किया था। उसके बाद एक दूसरा वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें छात्रा भी संजय, विक्रम और सचिन के साथ कार में बैठी हुई रंगदारी मांगने के विषय पर चर्चा कर रही थी।

इस मामले में पूर्व एमएलसी व भाजपा नेता जयेश प्रसाद ने छात्रा की गिरफ्तारी की मांग की थी और स्वामी चिन्मयानंद के गिरते स्वास्थ्य पर चिंता जताई थी । इसके बाद सोमवार को सीने में दर्द और निम्न रक्तचाप की शिकायत के बाद चिन्मयानंद को लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई के कार्डियालोजी विभाग में भर्ती कराया गया था ।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल इंटेसिव केयर यूनिट में भर्ती चिन्मयानंद की स्थिति में मंगलवार को दूसरे दिन काफी सुधार देखने को मिला । उनका रक्तचाप बिल्कुल सामान्य है, उनका मधुमेह पूरी नियंत्रित है । उन्होंने आज भोजन भी किया और बातचीत भी कर रहे हैं। अग्रवाल ने कहा कि अगर हालत ठीक रही तो संभवत: दो दिन में चिन्मयानंद को अस्पताल से छुट्टी दे दी जायेगी ।

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