गलियां काशी की आत्मा, रूपांतरण जरूरी : सद्गुरु

Updated on: 20 October, 2019 05:52 PM

गलियां काशी की आत्मा हैं। जैसे सामान्य व्यक्ति से साधक बनने के लिए मनुष्य को रूपांतरित होना पड़ता है, मैं भी हुआ, उसी प्रकार काशी की गलियां भी विशिष्ट हैं। काशी की गलियों का भी रूपांतरण होना चाहिए। ये कोई साधारण गलियां नहीं हैं। इन गलियों में आदियोगी के ज्ञान का भेद छिपा है। बस उस भेद को देखने वाली नजर और समझने वाली बुद्धि चाहिए।

ये विचार सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने मंगलवार को टॉक टुडे न्यूज़ के साथ खास बातचीत के दौरान व्यक्त किए। तीन दिनों के काशी प्रवास के दौरान अपने आखिरी शूट के लिए सद्गुरु दरभंगा घाट स्थित बृजरमा पैलेस से निकल कर गली के रास्ते दशाश्वमेध मुख्य मार्ग तक पहुंचे। नीले रंग का कुर्ता, सफेद धोती और भूरे रंग की सैंडल पहने सद्गुरु ने बड़ी सी हैट लगा रखी थी। गर्दन झुका कर मुख्य मार्ग की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान गली में चलते-चलते उन्होंने अनौपचारिक बातचीत की। सद्गुरु ने कहा कि मैं पहली बार काशी की गली में आया हूं। मेरी उम्मीद के विपरीत गलियों में काफी गंदगी दिखी। बावजूद इसके इन गलियों में एक चुंबकीय आकर्षण है। यह आकर्षण ही मुझे बार-बार प्रेरित कर रहा है कि मैं इन गलियों में भटकूं। व्यस्तता के कारण मैं इस बार गलियों में घूमने का पूरा सुख नहीं ले सका। उन्होंने कहा, आदियोगी की कृपा रही तो अगले वर्ष 23 सितंबर को मैं पूरी योजना के साथ काशी आऊंगा और जी भरकर गलियों के चुंबकीय आकर्षण को महसूस करूंगा।

आतंकवाद का एकमात्र समाधान प्रेम

आतंकवाद के प्रश्न पर सद्गुरु ने कहा कि इसका एकमात्र समाधान प्रेम है। न सिर्फ आतंकवाद की समस्या बल्कि दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान प्रेम से किया जा सकता है। कश्मीर से धारा 370 और 35ए के बारे में पूछने पर सद्गुरु ने कहा गली में चलते-चलते इस विषय पर बात करना मुनासिब नहीं। इससे बेहतर होगा कि मैं इस विषय में कुछ न बोलूं।

सद्गुरु ने शिवलिंग से मिलाई नजर और कांपने लगा शरीर

काशी करवत मंदिर, जहां कभी लोग अपना शीश काट कर शिव का चढ़ा दिया करते थे, में मंगलवार सुबह जब सद्गुरु जग्गी वासुदेव पहुंचे तो वहां दुर्लभ दृश्य दिखा। मंदिर में भूतल से करीब तीस फिट नीचे विद्यमान शिवलिंग को सद्गुरु ने अपलक निहारना शुरू किया। तीन मिनट बीतते ही सद्गुरु के शरीर में कंपन शुरू हो गया। मानों, उनके शरीर को बिजली करंट का झटका लग रहा हो।

मंदिर में पहले से मौजूद लोग अचंभित थे। साथ आईं फिल्म अभिनेत्री जूही और कंगना भी वह दृश्य देखकर हैरान थीं। सद्गुरु के दो गेरुआधारी शिष्यों ने लोगों को हाथ के इशारे से शांत रहने को कहा। उन्होंने ऐसा भाव प्रकट किया जैसे सब कुछ सामान्य है। सद्गुरु ने अपना शरीर रेलिंग के पास खंभे के सहारे टिका दिया और शिवलिंग की ओर ही अपलक देखते रहे। करीब छह मिनट बाद सामान्य स्थिति में आने पर सद्गुरु ने अपनी अनुभूति को शब्दों में व्यक्त किया जिसे उनकी कैमरा टीम ने रिकार्ड किया। फिल्म स्टार जूही चावला और कंगना रनौत के साथ सद्गुरु सुबह करीब दस बजे काशी करवत पहुंचे थे।

इसके बाद सद्गुरु कॉरिडोर के रास्ते मणिकर्णिका घाट गए। वह करीब पौन घंटे तक मणिकर्णिका घाट और आसपास की गलियों में निर्विकार भाव से घूमते रहे। घाट की ओर जाने वाले प्रत्येक शव को देखकर सद्गुरु रुक कर दोनों हाथ जोड़ कर शवरूप में शिव को प्रणाम करते रहे। गलियों में घूमते हुए जूही चावला सवाल करती रहीं और वह उनके सवालों के जवाब देते रहे। इस सवाल-जवाब को सद्गुरु की कैमरा टीम फिल्मा रही थी। गलियों के रास्ते पुन: विश्वनाथ मंदिर के पास आने पर उन्होंने काशी की लस्सी ग्रहण की। इसके बाद वह गलियों से पीछे के रास्ते से ललिता घाट स्थित नेपाली मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने कंगना रनौत को दिए गए साक्षात्कार में काशी के महात्म्य पर चर्चा की।

इसके बाद जूही चावला बाबतपुर हवाई अड्डे जबकि सद्गुरु, कंगना रनौत के साथ बृजरमा पैलेस, दरभंगा घाट के लिए रवाना हो गए। वहां करीब डेढ़ घंटे विश्राम के बाद वह कंगना रनौत के साथ गलियों में पदयात्रा करते हुए दशाश्वमेध मुख्य मार्ग पर आए। यहां दोनों एक ही वाहन में सवार हुए। यहां से वह काशी के पंचक्रोशी मार्ग पर स्थित रामेश्वर मंदिर रवाना हो गए। रामेश्वर मंदिर में भी कंगना ने सद्गुरु से साक्षात्कार लिया।

View More

24x7 HELP

Visitor
अब तक देखा गया