उप्र -बिहार-झारखंड में डरावना है बाढ़ का मंजर, 100 से ज्यादा मौत, कई बेघर

Updated on: 20 October, 2019 02:43 AM

उत्तर प्रदेश.. बिहार.. झारखंड.. तीनों राज्य बाढ़ की भीषण समस्या से जूझ रहे हैं। स्कूल कॉलेज बंद, अस्पताल में फैली अव्यवस्था का भयावह मंजर देख आंखें फटी की फटी रह जा रही हैं। राज्यों के प्रशासनिक विभाग और सरकारों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 24 घंटे के लिए अलर्ट जारी किया हुआ है। लगातार हो रही बारिश से बाढ़ की समस्या का निदान दूर तक दिखाई नहीं दे रहा। तीनों राज्यों में 100 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। कई बेघर हो चुके हैं तो कई अपनों से बिछड़ गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सकुशल निकाले गए लोग राहत शिविरों में बाढ़ के कम होने का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले एक-दो दिन तक समस्या गंभीर बनी रहेगी। बारिश के रुकने के बाद ही खतरों के निशान से ऊपर बह रही नदियों का जलस्तर नीचे जाने की उम्मीद है। तीनों राज्यों में बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा कई करोड़ के ऊपर जा चुका है। प्रशासन व सरकार द्वारा बाढ़ राहत राशि की घोषणा जरूर की गई है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोगों के नुकसान की भरपाई इससे नहीं हो पाएगी। बाढ़ ने इन तीनों राज्यों के प्रभावित लोगों को कभी न भूल पाने वाला गम दे दिया है।

बिहार :सीएम नीतीश बोले- बाढ़ प्रभावितों के लिए जगह-जगह राहत शिविर लगाएं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नदियों के जलस्तर पर हर वक्त नजर रखने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया है। कहा कि नेपाल में ज्यादा बारिश होती है तो गंडक, बूढी गंडक, बागमती सहित पूरा उत्तर बिहार प्रभावित होता है। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने एक अणे मार्ग में शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की और पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि 28, 29 और 30 सितंबर को नेपाल में 300 मिलीमीटर तक बारिश होने की आशंका है। इसे देखते हुए एहतियात के तौर पर पिपरासी बांध के आस-पास के चार गांवों के लोगों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है।

सिर्फ कम्युनिटी किचेन से काम नहीं चलेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सिर्फ कम्युनिटी किचेन से काम नहीं चलेगा। प्रभावित लोगों के बीच अधिक से अधिक राहत देने के लिए जगह-जगह राहत शिविर की व्यवस्था करनी होगी। जिन गांवों में बाढ़ का पानी चला गया है, वहां के लोगों को सुरिक्षत स्थानों पर तत्काल पहुंचाने का प्रबंध करें। उन्होंने प्रभावित इलाकों के डीएम को हर वक्त चौकस रहने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में पदाधिकारियों से कहा कि वह शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ प्रभावित इलाकों की वर्तमान स्थिति का जायजा लेंगे। कहा कि आपदा प्रभावित लोगों से लिए सरकार पूरी तरह सजग है। उम्मीद है इस बार भी लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।

सिर्फ बारिश के कारण जलस्तर नहीं बढ़ सकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि भागलपुर में जलस्तर बढ़ने का क्या कारण है, इसे देखें। सिर्फ वर्षा के कारण जलस्तर नहीं बढ़ सकता है। खगड़िया में भी सचेत रहने की जरूरत है। साथ ही पटना में भी विशेष रूप से निगरानी रखें। क्योंकि 1975 और 1976 में पुनपुन नदी का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि शनिवार से हथिया नक्षत्र शुरू हो रहा है। यह मान्यता है कि शनिवार के दिन बारिश शुरू होती है तो तीन दिनों तक लगातार बारिश होती रहती है।

एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की तैनाती की गई

बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने अररिया, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सीतामढ़ी, किशनगंज, बगहा, सहरसा, सुपौल, मुजफ्फरपुर, नवगछिया, भागलपुर सहित बाढ़ प्रभावित इलाकों, नदियों के बढ़े जलस्तर, नदियों पर बने बांध आदि की वर्तमान स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था की गयी है। पॉलीथिन शीट व हर जरूरी सामग्री उपलब्ध करा दी गयी है। प्रभावित इलाकों में एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ टीम की तैनाती की गयी है। गुवाहाटी से भी एनडीआरएफ की टीम पहुंच चुकी है।

भागलपुर में जलस्तर चार सेंटीमीटर बढ़ा

प्रत्यय अमृत ने बताया कि तेज और निरंतर बारिश से भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर करीब चार सेंटीमीटर बढ़ा है, लेकिन फरक्का बराज से 19 लाख क्यूसेक के हिसाब से पानी डिस्चार्ज होने के कारण जलस्तर कम होने की उम्मीद है। नवगछिया में जमींदारी बांध की स्थिति ठीक है। खगड़िया में भी जलस्तर में कमी आ रही है।

उत्तर प्रदेश: 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश से डरे शहर के लोग

बीते चौबीस घंटे से लगातार हो रही बारिश से पूरा शहर तरबदतर है। लगातार बारिश से शहर के दर्जनों मोहल्ले लबालब हो गए। अल्लापुर की स्थिति सबसे दयनीय बन गई है। यहां पंप की क्षमता के अनुसार पानी ज्यादा है। जिस कारण पानी निकलने में समस्या हो रही है। समस्या की जानकारी महापौर, डीएम समेत सभी अफसरों को दी गई। बारिश बुधवार रात से ही शुरू हो गई थी। लेकिन बीच-बीच में बारिश रुकने से शहर प्रभावित नहीं हुआ। गुरुवार रात शुरू हुई बारिश शुक्रवार देर रात तक होती रही। जिससे कई मोहल्ले लबालब हो गए। खासकर अल्लापुर में करीब तीन फीट तक पानी गलियों व सड़क के अलावा लोगों के घरों में भर गया।

दो हजार घरों में घुसा पानी

अल्लापुर में बारिश के कारण कैलाशपुरी, शिवाजीनगर, रामानंदनगर, बाघम्बरी रोड, बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम, मटियारारोड समेत कई मोहल्ले जलमग्न हो गए। दूसरी ओर करैलाबाग, मीरापट्टी समेत कई मोहल्लों में पानी भर गया। पानी के साथ करीब दो हजार घरों में घुसी गंदगी देख लोग परेशान हो गए और सामान समेत दूसरी मंजिल पर पहुंच गए। स्कूल गए सैकड़ों बच्चों को घर पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां तक बाघम्बरीगद्दी रोड पर पूर्व मेयर व मंत्री रहे सत्यप्रकाश मालवीय के घर में भी पानी घुस गया।

पंप की क्षमता कम, पानी ज्यादा

बक्शीबांध के नीचे अल्लापुर की तरफ क्षेत्र का पानी निकालने के लिए तीन बड़े पंप समेत कुछ 15 पंप लगाए गए हैं। बारिश शुरू होते ही सारे पंप चालू कर दिए गए थे लेकिन बारिश नहीं रुकी और क्षेत्र में पानी भरने लगा। बताया जा रहा है कि पंप की क्षमता कम थी, जिस कारण पानी ज्यादा नहीं निकाला जा सकता। पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह ने डीएम भानुचंद्र गोस्वामी को स्थिति से अवगत कराया। इसी तरह मीरापट्टी व करैलाबाग के मोहल्लों में भरे पानी को नगर निगम ने पंप लगाकर निकलवाना शुरू किया।

अफसरों में हड़कंप, पहुंचे बक्शीबांध

अल्लापुर क्षेत्र के घरों में पानी घुसने की जानकारी मिलने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त डॉ. उज्जवल कुमार, एडीएम सिटी, जलकल विभाग के कई अफसर बक्शीबांध पहुंचे। पंपिंग स्टेशन पर ढाई क्यूसिक की रखी मशीन को भी लगाने का निर्देश दिया गया। नगर आयुक्त ने अफसरों को मॉनीटरिंग करने व शहर में कहीं भी जलभराव हो तुरंत वहां पहुंचकर समस्याएं दूर करने का निर्देश दिया।

मम्फोर्डगंज एसटीपी का स्लूज गेट खोला

बाढ़ के कारण बक्शीबांध व मोरी का स्लूजगेट बंद किया गया था। ऐसे में अल्लापुर समेत अन्य क्षेत्रों का पानी नाले से होकर मम्फोर्डगंज एसटीपी के पास लगे पंपिंग स्टेशन से निकालकर नदी की तरफ ले जाया जा रहा था। मम्फोर्डगंज एसटीपी पर लगे तीन स्लूजगेट बंद कर दिए गए थे।  लगातार बारिश के कारण शुक्रवार सुबह मम्फोर्डगंज एसटीपी का एक स्लूजगेट खोल दिया गया। ताकि पानी आसानी से निकल सके। अफसरों ने बताया कि बक्शीबांध, छोटाबघाड़ा की तरफ अभी बाढ़ का पानी है। इसलिए इधर का स्लूजगेट खोला नहीं जा सकता।
 
तेलियरगंज में भी दर्जनों घरों में घुसा पानी

तेलियरगंज क्षेत्र के दर्जनों घरों में बारिश का पानी घुस गया। जिससे लोग परेशान हो गए। क्षेत्रीय पार्षद रंजन कुमार ने बताया कि क्षेत्र में कुछ 13 नाले हैं। कई बार आग्रह करने पर सिर्फ एक ही नाला साफ किया जा सका। दूसरी ओर एमएनएनआईटी गेट से सड़क के दोनों ओर बनाए गए नाले को शंकरघाट मोहल्ले की नालियों में जोड़ दिया गया है। नाले का पानी नालियों से होकर लोगों में घरों में घुस गया है।

छोटा बघाड़ा व सलोरी के लोग भी परेशान

बारिश का पानी न निकलने से छोटा बघाड़ा व सलोरी के लोग भी परेशान है। जगह-जगह जलभ्रराव से लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। एलनगंज पार्षद नितिन यादव ने बताया कि ढरहरिया मार्ग भृगु मार्ग पर बारिश का पानी भरा हुआ है। यहां लगा एक पंप जार्जटाउन क्षेत्र में भेज दिया गया है। जिस कारण यहां का पानी नहीं निकल रहा है। सलोरी पार्षद मंजीत कुमार ने बताया कि माधव डेयरी के बगल नाला बारिश में ओवरफ्लो हो जाता है और पानी बाहर बहने लगता है। नाले की सफाई कभी नहीं होती।

झारखण्ड: लगातार बारिश ने मचाई भारी तबाही

झारखंड में चार दिनों से लगातार बारिश हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में पानी भरा हुआ है। कई नदियां उफान पर हैं। कई जिलों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। आगामी तीन दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बंगाल की खाड़ी के उत्तर व आसपास के क्षेत्रों में शनिवार तक निम्न दाब क्षेत्र बनने की संभावना है।

गढ़वा

लगातार बारिश से जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं। कई गांव में पानी भरा हुआ है। कांडी प्रखंड क्षेत्र का अधौरा गांव में खेत, स्कूल, अस्पताल और घर में पानी घुस गया है। किसानों की फसलें और कई ग्रामीणों के घरों को काफी नुकसान पहुंचा है।

चतरा में बारिश ने सौ गांव का संपर्क तोड़ा

मूसलाधार बारिश की वजह से पिछले पांच दिनों में इस मानसून में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है। पांच दिनों 96 मिमी बारिश का आंकड़ा सामने आया है। छोटे-बड़े करीब दर्जनों पुल और पुलिया धाराशायी हो गए। नदियों पर पुल का निर्माण नहीं होने के कारण 100 से अधिक गांव टापू बन गए हैं। इन गांवों का संपर्क जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों से पूरी तरह से टूट गया है।

खतरे के निशान के ऊपर दामोदर नदी

धनबाद के जामाडोबा वाटर बोर्ड स्थित दामोदर नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। बिजली आपूर्ति ठप है। जल भंडारण प्रभावित है। झरिया और आसपास के क्षेत्र में जलापूर्ति प्रभावित हो गई है।

View More

24x7 HELP

Visitor
अब तक देखा गया