युगांडा में भी भारत ने खोली पाकिस्तान की पोल, कश्मीर मुद्दे पर दिया करारा जवाब

Updated on: 20 October, 2019 02:23 AM

पाकिस्तान ने शनिवार को युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 64वें कॉमनवेल्थ देशों के संसदीय सम्मेलन में एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाया, जिसका भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा विरोध किया। कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में पाकिस्तान ने कश्मीर में भारतीय जवानों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कश्मीरियों को बंधक बनाने का झूठा आरोप लगाया। इस पर भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य रूपा गांगुली ने कश्मीर पर पाकिस्तानी दुष्प्रचार का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि सैनिक शासन की परंपरा पाकिस्तान में है। पाकिस्तान 33 साल से सेना के शासन में रहा है। भारत में लोकतंत्र की जड़ें बड़ी गहरी हैं। भारत में कभी और कहीं भी सैनिक शासन नहीं रहा है और न ही कभी होगा।

लोकसभा अध्यक्ष कर रहे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस (सीपीसी) में सभी सदस्य देशों की संसद से जुड़े अधिकारी और चुने हुए प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल 22 से 29 सितंबर तक सम्मेलन में भाग लेने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस से राज्यसभा सांसद एल हनुमनथैय्या, राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली, भुवनेश्वर की सांसद अपराजिता सारंगी और लोकसभा की सचिव स्नेहलता श्रीवास्तव शामिल हैं।

कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में जुटा पाक
भारत सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों उठा रहा है। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान ने इससे पहले मालदीव में एक और दो सितंबर को आयोजित किए गए दक्षिण एशियाई देशों की संसदों के अध्यक्षों के चौथे शिखर सम्मलेन में भी कश्मीर मुद्दा उठाया था, जिसका लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के नेतृत्व में जोरदार विरोध किया गया था।

यूएन में भी पाक की किरकिरी
शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था। इस पर संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा था कि जेंटलमैन गेम (क्रिकेट) खेलने वाले इमरान का भाषण दर्रा आदमखेल की बंदूकों जैसा असभ्य था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अकेला देश है, जहां अलकायदा और अन्य आतंकियों को पेंशन और पनाह मिलती है।

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