बीएचयू के सहायक प्रोफेसर एसटी का फर्जी प्रमाणपत्र लेने में फंसे, जांच के आदेश

Updated on: 06 December, 2019 02:29 PM

एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मनोज वर्मा को अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र लेने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। आयोग ने जांच में पाया है कि उनके पिता व अन्य परिवारीजन पिछड़ी जाति के कहार थे। आयोग ने वाराणसी जोन के एडीजी को निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच करें और आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके द्वारा नौकरी हासिल करने के भी दस्तावेजों की जांच हो।

आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने बताया कि चंदौली के अनंत नारायण मिश्रा ने 27 सितंबर 2019 को शिकायत की थी कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर मनोज वर्मा व उनके भाई अरविंद अनुसूचित जनजाति (खरवार) का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर पोस्ट डाक्टरल फेलोशिफ कर रहे हैं। उन्होंने अपने इस कृत्य को छिपाने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व हेड अरविंद कुमार जोशी, अनंत नारायण मिश्रा व अन्य के विरुद्ध वाराणसी के लंका थाने में एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया था।

उन्होंने कहा कि आयोग ने जांच में पाया है कि मनोज वर्मा, उसके पिता कन्हैया प्रसाद व उसके परिवार के सदस्यों के कहार जाति का होने के संबंध में कई प्रमाण मिले हैं। जांच में पाया गया है कि उनके पिता जिला सहकारी बैंक मिर्जापुर में सहयोगी के पद पर थे, जिसकी ज्येष्ठता तय करने में उन्हें पिछड़ी जाति के रूप में दर्ज किया गया।

यही नहीं बैंक के ड्यूटी रिकार्ड में कन्हैया प्रसाद को जाति हिंदू कहार, पिछड़ी जाति दर्ज है। इसी तरह 'उत्तर प्रदेश शासन पंचायती राज द्वारा जारी परिवार रजिस्टर में उनके पिता कन्हैया प्रसाद, उनकी पत्नी नंदिनी, उनके पुत्र गोपाल, अरविंद व मनोज व परिवार के अन्य सदस्यों को पिछड़ी जाति हिंदू कहार के रुप में दर्ज किया गया है। इसी के साथ सोनभद्र से जारी जाति प्रमाण पत्र में उन्हें खरवार अनुसूचित जनजाति का दिखाया गया है।

एससी बताकर हासिल की गई नौकरी के दस्तावेज भी जांचें

आयोग ने जांच में पाया है कि यह न केवल एक बहुत ही गंभीर प्रकरण है बल्कि एससीएसटी एक्ट का उल्लंघन भी है। उन्होंने अपनी जाति छिपाने के लिए सोनभद्र से फर्जी प्रमाणपत्र बनाया। आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने कहा कि एडीजी वाराणसी जोन को निर्देश दिए गए हैं कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालयों में एससीएसटी के आधार पर हासिल की गई नौकरी के दस्तावेज भी जांचें जाएं। पूरे प्रकरण की जांच कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस जांच में हुए खुलासे के आधार पर अनंत नारायण मिश्रा व अरविंद कुमार जोशी आदि के खिलाफ दर्ज कराये गए फर्जी एससीएसटी के मुकदमे को खारिज कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने वाराणसी पुलिस से 30 अक्तूबर तक मामले की प्रगति रिपोर्ट भेजने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारी संख्या में कहार, कुम्हार और भड़भूंजे जाति के लोगों ने खुद को फर्जी तरीके से नौकरियां हासिल कर रखी हैं। आयोग की ऐसे लोगों पर नज़र है।

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