गांधी जी की 150वीं जयंती पर PM मोदी ने किए चार ट्वीट, जानें क्या कहा

Updated on: 20 October, 2019 12:30 PM

स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख गढ़ रहे काशी विद्यापीठ के यशस्वी छात्रों में लाल बहादुर शास्त्री का नाम भी शामिल है। उन्होंने यहीं से स्नातक की डिग्री हासिल की। इस डिग्री को उस समय शास्त्री' कहा जाता था। लाल बहादुर शास्त्री ने विद्यापीठ से ही अपने नाम के आगे शास्त्री' लगाना शुरू किया। पहले उनका नाम लाल बहादुर वर्मा था। विद्यापीठ परिवार बड़े ही गर्व से शास्त्री जी का नाम *लेता है।

विद्यापीठ उस समय और भी गौरवान्वित हुआ जब बतौर प्रधानमंत्री 6 फरवरी 1965 को उन्होंने यहां के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि काशी विद्यापीठ के प्रति आकर्षण उनके लिए स्वाभाविक है। इसी विद्यापीठ में वह भी एक विद्यार्थी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यापीठ के पुराने दिनों की याद की। यहां की शिक्षा व्यवस्था का जिक्र किया। शास्त्री जी ने कहा कि उस समय हिन्दी में पाठ्य-पुस्तकों का अभाव था। ऐसे अध्यापकों की कमी थी, जो हिन्दी भाषा में इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र और दर्शनशास्त्र आदि विषयों ऊंची कक्षाओं मे पढ़ा सकें। देश की व्यवस्था के सामने विद्यापीठ ने यह उदाहरण रखा कि ऊंची शिक्षा के लिए विदेशी भाषा की जरूरत नहीं है।

हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने बताया कि शास्त्री जी 1925 में काशी विद्यापीठ से शास्त्री में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। दर्शन उनका पसंदीदा विषय था। शास्त्री परीक्षा पास करने बाद उन्होंने अपने नाम के आगे शास्त्री लगाना शुरू कर दिया। प्रख्यात दार्शनिक और भारतरत्न भगवानदास उनके गुरु थे। काशी विद्यापीठ में उनकी स्मृति में एक छात्रावास है।

हर-हर महादेव सुन शास्त्री ने तोड़ा था प्रोटोकॉल
बात वर्ष 1962-63 की है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पं. लाल बहादुर शास्त्री दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में शामिल होने वाले बीएचयू के विद्यार्थियों से प्रोटोकॉल तोड़ कर मिले। आयोजन के बाद वह लौट रहे थे कि कुछ छात्र-छात्राओं ने हरहर महादेव का जयघोष कर उनका अभिनंदन किया। दिल्ली में हरहर महादेव का घोष सुनते ही शास्त्री जी उन विद्यार्थियों के पास पहुंचे। उनसे मुलाकात की और साथ में फोटो भी खिंचवाई। शास्त्रीजी को हरहर महादेव से आकर्षित करने वाले विद्यार्थियों की टीम में पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य भी शामिल थे जो उस समय बीएचयू के सांस्कृतिक सचिव और डी.म्यूज के छात्र थे।
कायस्थ महासभा ने मनाई शास्त्री जयंती
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के तत्वावधान में मंगलवार को सिगरा स्थित शास्त्री पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती मनाई। उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्रीजी सरल एवं ईमानदार होने के साथ कार्य के प्रति कठोर व्यक्तित्व के स्वामी थे। वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्क्ष डा. मुकेश ने कहा कि काशी के लाल ने सादगीपूर्वक जीवन यापन कर राष्ट्रनिर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई। प्रदेश संगठन मंत्री शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव समेत अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए।

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