बुराई के प्रतीक दशानन का अंत, DLW और मलदहिया में रावण दहन

Updated on: 20 October, 2019 02:31 AM

असत्य पर सत्य की जीत की कामना लिये डीरेका के प्रसिद्ध दशहरा मेले में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतले धूं-धूंकर जले तो स्टेडियम में जय श्रीराम की जय-जयकार होने लगी। परिसर श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। मंगलवार शाम चार बजे से तीन घंटे तक संगीतमय श्रीरामलीला के रूपक की प्रस्तुति के बाद श्रीराम के चरित्र ने पुतले का दहन किया। वहीं, मलदहिया चौराहे पर भी लीला के बाद रावण के विशालकाय पुतले को जलाया गया।

डीरेका स्टेडियम में शाम चार बजे से रामचरित मानस पर आधारित संगीतमय श्रीरामलीला का मंचन शुरू हुआ। इसके लिए मैदान में अलग-अलग जगहों पर पंचवटी, किष्किंधा, अशोक वाटिका, लंका और रावण दरबार बनाये गये थे। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान, रावण, कुंभकर्ण समेत अन्य सभी के चरित्र में तैयार छात्रों ने रामायण की जीवंत प्रस्तुति दी। राम वनगमन, सीता हरण, लंका दहन, लक्ष्मण पर शक्ति प्रयोग, राम विलाप, सीता अग्निपरीक्षा आदि विविध प्रसंगों को जीवंतता से दर्शाया। अंत में श्रीराम और दशानन अपनी सेना के साथ आमने-सामने हुए। भीषण युद्ध के बाद आखिरकार दशानन का अंत हुआ और उसके पाप का साम्राज्य ढह गया। कुंभकर्ण, मेघनाद और रावण वध के बाद उनके पुतलों का दहन किया गया। दशानन के अंत की खुशी में आकर्षक आतिशबाजी हुई।

कजरी, चइता की प्रस्तुति ने मोहा

डीरेका में रूपक के मंचन के दौरान कजरी, चइता की प्रस्तुतियों ने लोगों को बांधे रखा। इस बार परंपरा से हटकर रूपक में इसे भी जोड़ा गया।

उमडी़ भीड़ को व्यवस्थित करने में छूटा पसीना

दशहरा मेला और रावण दहन देखने के लिए शाम से ही लोग डीरेका पहुंचने लगे। शाम छह बजते-बजते हजारों की भीड़ परिसर में उमड़ पड़ी। स्टेडियम के ईर्द-गीर्द जबरदस्त भीड़ थी। स्टेडियम के भीतर रावण दहन देखने के लिए लोगों को जूझना पड़ा।

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