चार दिनी कारपेट एक्सपो आज से, कई देशों से काशी पहुंचे खरीददार

Updated on: 19 November, 2019 01:59 AM

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की ओर से 34वें इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान में शुक्रवार से शुरू होगा। सुबह 11 बजे से वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के सचिव रवि कपूर इसकी औपचारिक शुरुआत करेंगे। परिषद के अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि 14 अक्तूबर तक चलने वाले एक्सपो से 500 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। एक्सपो में 57 खरीदार अमेरिका, चीन से 36, ऑस्ट्रेलिया से 18 खरीदार आ रहे हैं। इसके अलावा चिली, कोलंबिया, वियतनाम, यूक्रेन, कजाकिस्तान, कुवैत, कतर, थाइलैंड से भी खरीदार यहां आएंगे। इनमें कई काशी पहुंच गए हैं।

ताज होटल में पत्रकारों से सिद्धनाथ सिंह ने गुरुवार को बताया कि इसमें चार सौ से अधिक खरीदार भाग ले रहे हैं। छह हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में तैयार आयोजन स्थल पर कुल 230 कालीन निर्यातक अपने स्टाल लगा रहे हैं। बताया कि यह वाराणसी का 15वां कारपेट एक्सपो है। यहां खरीदारों के लिए एक ही छत के नीचे सर्वश्रेष्ठ हस्तनिर्मित कालीन व अन्य फ्लोर कवरिंग उपलब्ध हैं। विदेशी खरीदारों की मांग के अनुरूप विभिन्न डिजाइन, रंग, गुणवत्ता और आकार के कालीन के सैंपल यहां दिखेंगे। ऊन, रेशम, कृत्रिम फाइबर, जूट, कपास से तैयार कालीन भी दिखेंगे। बताया कि शुभारंभ के दौरान विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार के शांतमनु भी मौजूद रहेंगे। पत्रकार वार्ता में उपाध्यक्ष उमर हमीद और अन्य सदस्यों ने बताया कि यह कालीन मेला व्यवसाय को बढ़ायेगा।

मंदी का असर, 20 फीसदी तक कारोबार प्रभावित
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि दुनिया में मंदी का असर कालीन के कारोबार पर भी पड़ा है। कालीन का कारोबार 15 से 20 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। उन्होंने निर्यातकों से धैर्य बनाये रखने की अपील की। कहा कि मंदी से उबरने के बाद तेजी से कारोबार चढ़ेगा।

पहली बार लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिए जाएंगे
कालीन कारोबार से जुड़े छह निर्यातकों को पहली बार लाइफटाइप अचीवमेंट पुरस्कार दिए जाएंगे। ताज होटल में आयोजित कार्यक्रम में यह पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके अलावा 15 अन्य निर्यातकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इसमें पांच श्रेणी के निर्यातक चुने गए हैं। हैंडलूम, हैंडमेड, दरी, सिल्क और इंडो-नेपाल वर्ग के निर्यातक सम्मानित होंगे। इसकी घोषणा भी सम्मान समारोह के दौरान होगी।

अमेरिका से बड़ा कारोबारी मित्र होगा चीन
अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि फिलहाल अमेरिका हमारा सबसे बड़ी कालीन खरीदार है। कुल कारोबार का 48 फीसदी अमेरिका से आता है। दूसरे नंबर पर चीन है। जहां से लगातार कारोबार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में चीन ही सबसे बड़ा कारोबारी मित्र होगा। बताया कि इस एक्सपो में 57 खरीदार अमेरिका से, चीन से 36, ऑस्ट्रेलिया से 18 खरीदार हैं। इसके अलावा चिली, कोलंबिया, वियतनाम, यूक्रेन, कजाकिस्तान, कुवैत, कतर, थाइलैंड से भी खरीदार यहां आएंगे।

मशीनमेड कालीन कारोबारियों के लिए चुनौती
परिषद के सदस्यों ने बताया कि इस समय भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मशीन से बनी कालीन है। उपयोग कर फेंक देने वाली कालीन मशीनों से कम लागत में बनाई जा रही हैं, जिसके खरीदार भी बढ़े हैं, लेकिन इसकी गुणवत्ता हाथ से बनी कालीन जैसी नहीं है। सिंह ने बताया कि सरकार से हाथ से बनी कालीन की लागत घटाने के लिए छूट देने की मांग की गई है।

कश्मीर के कालीन ईरान से बेहतर
परिषद के सदस्यों ने कहा कि ईरान की कालीन से बेहतर कश्मीर की कालीन हैं। अमेरिका में बैन होने के बाद से ईरान ने अपनी कालीन के दाम गिरा दिए है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान की कालीन की मांग बढ़ गई है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां कारोबार विस्तार पर अध्यक्ष ने कहा कि पहले से ही यहां कालीन कारोबार बेहतर रहा है।

सड़कों की हालत पर सवाल
परिषद के अध्यक्ष ने खस्ताहाल सड़कों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। कहा कि देश में कालीन कारोबार का 60 फीसदी हिस्सा भदोही का है। बावजूद यहां की सड़कों और बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। भदोही में आये खरीदार यहां और लोहता की सड़कों की हालत देखकर लौट गए। सड़कों की हालत सुधारने के लिए जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को पत्र लिखा गया है। जीआई टैगिंग, भदोही के लिए विशेष पैकेज, रूस, ब्राजील व चीन में कालीन कारोबार पर लगने वाले टैक्स को कम करने की मांग सरकार से की गई है।

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