कमलेश तिवारी हत्याकांड में शूटरों की पहचान को लेकर बड़ा सवाल, पुलिस भी हैरान

Updated on: 04 June, 2020 07:21 PM

कमलेश तिवारी हत्याकांड में अब तक पुलिस और एसटीएफ को कई कड़ियां मिलती जा रही जिससे हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन तक पहुंचना आसान हो रहा है। अब पुलिस ने दोनों शूटरों पर ढाई ढाई लाख का इनाम भी घोषित कर लिया है। लेकिन इस हत्याकांड में अब तक सबसे बड़ा सवाल जिस पर पुलिस अफसरों को हैरानी भी हैरानी है वह यह है कि सूरत से कमलेश की हत्या करने आए इन हत्यारों ने कहीं भी अपनी पहचान छिपाने की कोशिश आखिर क्यों नहीं की? कानपुर में सिम कार्ड खरीदा तो असली नाम और आईडी से। हत्या के समय भी सूरत से खरीदा मिठाई का डिब्बा बिल पर्ची के साथ ले गए। इसी तरह होटल खालसा इन में रुके तो वहां भी दोनों आरोपियों ने अपने असली आधार कार्ड को आईडी के तौर दिया। वह होटल से लेकर खुर्शेदबाग की गलियों में गए। 22 फुटेज उनके मिले। एक भी फुटेज ऐसा नहीं निकला जिसमें अशफाक और मोइनुद्दीन ने चेहरा छिपाया हो।

कानपुर : रेल बाजार से खरीदा था मोबाइल का सिम
कमलेश तिवारी के हत्यारोपितों ने कानपुर के रेल बाजार से सिम खरीदा था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और कमलेश तिवारी को किए गए फोन के नंबर की जांच के दौरान पता चला कि सिम कानपुर से खरीदा गया था। इस सूचना के बाद कानपुर एसटीएफ भी सक्रिय हुई। रविवार को पुलिस ने रेल बाजार के उस मोबाइल स्टोर को खोज निकाला जहां से सिम जारी किया गया था।

मुरादाबाद में हत्यारों को मदद भी मिली
एक पुलिस अधिकारी ने यह भी दावा किया है कि शूटरों को जब लगा कि वह पकड़े जा सकते हैं, तो उन्होंने अपने एक परिचित को सम्पर्क किया था। इस परिचित का एक काल के बाद ही मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। इस कॉल का पता लगने के बाद पुलिस अंदेशा जता रही है कि हत्यारों को मुरादाबाद में मदद उपलब्ध कराई गई।

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