कश्मीर दौरे पर गए EU सांसद बोले, हम हिटलर के समर्थक नहीं हैं

Updated on: 19 November, 2019 04:26 AM

कश्मीर दौरे पर गए हुए यूरोपीय संघ (ईयू) के 23 सांसदों ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि हमारे दौरे को गलत प्रचारित किया गया और यह एक सामान्य दौरा है। उन्होंने कहा कि हमें भारतीय राजनीति से मतलब नहीं है और कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं और शांति चाहते हैं।

ईयू सांसद ने कहा कि मेरे देश में भी आतंकवाद एक समस्या है। इस दौरे के दौरान हमने भारतीय सेना के लोगों से बात की है। उन्होंने कहा कि 40 साल में बीस से ज्यादा बार भारत आया हूं।

एक ईयू सांसद ने हम आपकी समस्या समझने के लिए कश्मीर में हैं और हम हिटलर के समर्थक नहीं हैं। सांसद ने कहा कि सब लोग स्कूल और अस्पताल खुलते हुए देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कल की आतंकी घटना से हम बहुत दुखी हैं। हम सिर्फ तथ्य जुटाने के लिए यहां आए हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा मकसद लोगों से मिलना था और जम्मू-कश्मीर को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। कश्मीर आना अच्छा अनुभव था और हम जम्मू-कश्मीर को दूसरा अफगानिस्तान बनते हुए नहीं देखना चाहते हैं। हमनें दुनियाभर में आतंक के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में बहुत भ्रष्टाचार है।

शीर्ष अधिकारियों ने ईयू सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के शीर्ष पुलिस एवं सिविल अधिकारियों ने यूरोपीय संघ (ईयू) के 23 सांसदों के एक शिष्टंडल को बताया कि लोग शांति के इच्छुक हैं लेकिन आतंकवादी गोलियां बरसाकर लगातार उन्हें डरा-धमका रहे हैं। विभिन्न यूरोपीय देशों के सांसदों से बातचीत के दौरान, डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति शांतिपूर्ण है और सुरक्षाबल कानून-व्यवस्था को प्रभावी तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह कि मानवीय तरीके से निपट रहे हैं।
उन्होंने यूरोपीय संघ के सांसदों को बताया कि पिछले 84 दिन में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई है। ये सांसद राज्य की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए दो दिवसीय दौरे पर हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने राज्य में स्थिति पर प्रतिनिधिमंडल को विस्तार से प्रस्तुति दी और उसके कुछ सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के जवाब दिए। जब ईयू के एक सांसद ने पूछा कि प्रशासन फर्जी खबरों से कैसे निपट रहा है तो पुलिस महानिरीक्षक एस पी पाणि ने कहा कि 'फेक न्यूज के प्रसार पर लगाम लगाना इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के कारणों में से एक है।

प्रधान सचिव एवं जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रवक्ता रोहित कंसल ने सांसदों को हालिया स्थानीय निकाय चुनावों और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द किए जाने का महत्व बताया। ईयू सांसदों की टीम ने नवनिर्वाचित पंचायत सदस्यों और पार्षदों समेत अन्य लोक प्रतिनिधियों से भी बात की।

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