प्रदूषण का जहर: प्रदूषण कर रहा है शरीर के अंगों पर चौतरफा वार, बचाव के लिए करें ये उपाय

Updated on: 14 November, 2019 02:40 AM

प्रदूषण का जहर: प्रदूषण कर रहा है शरीर के अंगों पर चौतरफा वार, बचाव के लिए करें ये उपाय


चिकित्सकों के मुताबिक प्रदूषण सिर के बाल से लेकर पैरों के नाखून तक को प्रभावित करता है। पार्टिकुलेट मैटर - पीएम 2.5 और इससे छोटे आकार के प्रदूषण कण फेफड़ों से गुजर कर आसानी से शरीर की कोशिकाओं में घुस जाते हैं। इसके बाद रक्त प्रवाह के माध्यम से वे शरीर के सभी अंगों की कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं प्रदूषण कैसे डाल रहा है शरीर पर बुरा असर और बचाव के लिए क्या करें उपाय। एम्स की न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉक्टर पद्मा श्रीवास्तव के मुताबिक फेफड़े में पहुंचने के बाद वायु प्रदूषण के महीन कण खून में पहुंच जाते हैं। इससे दिमाग में रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है। यह अल्जाइमर्स के खतरे को बढ़ा देता है। अध्ययनों में सामने आया है कि लंबे समय तक पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड से संपर्क का डिमेंशिया या बुजुर्गों में समझने की क्षमता में निरंतर गिरावट से संबंध पाया गया है।एम्स के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जीवन एस तितियाल ने बताया कि प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों में सूखापन , एलर्जी, दर्द के साथ यह आंसू को एसिडिक बना देता है। इससे आंखों को नुकसान पहुंचता है और रोशनी पर भी असर पड़ता है। आंखों को साफ पानी से धुलें। एम्स की रुमेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर उमा कुमार के मुताबिक प्रदूषण से जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। सांस लेने के दौरान पीएम 2.5 कण सांस की नली में पहुंच जाते हैं। इससे नली में सूजन आने लगती है। इसकी वजह से शरीर में एन्जाइमेटिक रिएक्शन होता है।एम्स के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर राकेश यादव के मुताबिक प्रदूषण से दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ जाता है। यह दिल की धमनियों में बाधा के लिए जिम्मेदार है। मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। कोशिश करें कि प्रदूषण स्तर ज्यादा होने पर घर से बाहर न निकलें और दिल की धड़कन तेज करने वाली गतिविधियों में हिस्सा न लें।एम्स के त्वचा रोग विशेषज्ञ केके वर्मा के मुताबिक प्रदूषण से बाल भी गिरने लगते हैं और इनकी चमक खोने लगती है। वहीं, त्वचा पर दाग-धब्बे हो जाते हैं और वह रूखी व बेजान लगती है। प्रदूषण से चेहरे की चमक खोने लग जाती है। एग्जिमा, त्वचा की एलर्जी, उम्र से पहले झुर्रियों के साथ त्वचा के कैंसर तक की आशंका बढ़ जाती है।एम्स के चिकित्सक विजय हड्डा के अनुसार, प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां होती हैं। इससे सांस लेने वाली नली में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण का सबसे बुरा असर अस्थमा के मरीजों पर होता है। बिना इन्हेलर के वह घर से बाहर न जाएं। बाहर के साथ अंदर के प्रदूषण से भी बचकर रहें1- वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर घर के बार और ट्रैफिक वाले इलाके के पास व्यायाम न करें।
2- घर से बाहर निकलते वक्त मास्क, तौलिया या कोई साफ कपड़े से मुंह को ढंकें।
3- घर से बाहर या शहर के किसी इलाके में जाने से पहले शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें। इसके आप अपने मोबाइल व इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
4- घर में कुछ भी ऐसी चीजें न बनाएं जिससे कि ज्यादा धुंआ निकले। कम ईंधन इस्तेमल होने वाला खाना पकाएं।
5- अपने आवास के आस पास किसी प्रकार का कचरा लकड़ी आदि न जलाएं या जलाने दें।
6- घर या दुकान के आसपास पानी का छिड़काव करें। पेड़ पौधों व पार्क में स्प्रिंकुलर या फौव्वारे से पानी का छिड़काव करें।
7- ज्यादा फल व हरी सब्जियां खाएं। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का इस्तेमाल करने की बजाए पैदल चलें या साइकिल का इस्तेमाल करें।
8- घर के अंदर बीड़ी, सिगरेट या किसी प्रकार के धूम्रपान का इस्तेमाल न करें।

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