BHU में संस्कृत की शिक्षा देंगे डा. फिरोज, बोले- कभी नहीं सहना पड़ा धार्मिक भेदभाव

Updated on: 02 July, 2020 08:32 PM

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी (बीएचयू) में हाल ही में संस्कृत के सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए डॉ. फिरोज आजकल चर्चा में हैं। इसकी मुख्य वजह बना उनका मुस्लिम होना। डॉ. फिरोज बताते हैं कि जब वह संस्कृत सीख रहे थे, तो उनके साथ भेदभाव नहीं किया गया। लेकिन अब वे इसे शिक्षण के माध्यम से प्रचारित करना चाहता हैं, तो उनका मुस्लिम होना विरोध का कारण बन गया है। उन्हें अचानक से उन्हें धर्म के नजरिये से देखा जाने लगा है।

बीएचयू के संस्कृत संकाय में डा. फिरोज की पिछले सप्ताह हुई सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति ने विवाद पैदा कर दिया है। जयपुर स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में वे एकमात्र मुस्लिम छात्र थे, जहां से उन्होंने 2018 में डॉक्टरेट पूरी की। 29 वर्षीय डा. फिरोज जयपुर के बगरू कस्बे से हैं। बीएचयू में संस्कृत विद्या विज्ञान (एसवीडीवी) संकाय में सहायक प्रोफेसर के रूप में चुने जाने से पहले करीब तीन साल आरएसकेएस जयपुर में अतिथि संकाय थे। वहीं, कॉलेज में उन्होंने संस्कृत नाटकों के मंचन के लिए युवा तरंग नामक एक थिएटर ग्रुप भी बनाया।

छात्रों ने हटाने की मांग

पिछले हफ्ते, कुछ छात्रों ने बीएचयू के कुलपति के निवास के पास उनकी नियुक्ति को रद्द करने की मांग को लेकर धरना दिया। बीएचयू प्रशासन अब तक अपने फैसले पर अडिग है। प्रशासन ने कहा है कि उसने सर्वसम्मति से सबसे योग्य उम्मीदवारों को पारदर्शी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से कुलपति की अध्यक्षता में नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने किया था सम्मानित

इस साल 14 अगस्त को डा. फिरोज को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर 'संस्कृत युवा प्रतिभा सम्मान' से सम्मानित किया। आयोजन के दौरान कई अन्य संस्कृत विद्वानों को सम्मानित किया गया था, लेकिन वह एकमात्र मुस्लिम थे।

बचपन से संस्कृत स्कूल में पढ़े

डॉ. फिरोज को कम उम्र से ही संस्कृत से लगाव रहा है। वे बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 2 में गांव के संस्कृत विद्यालय में दाखिला लिया। छोटा भाई वारिस भी वहीं पढ़ा। बगरू में संस्कृत स्कूल गांव की मस्जिद के बगल में है और इसमें कई मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं।

धर्म के कारण नहीं हुआ भेदभाव

आसिटेंट प्रोफेसर फिरोज बताते हैं, गांव में धर्म से कोई फर्क नहीं पड़ता था। यह कॉलेज में भी कोई मायने नहीं रखता था। मुझे धर्म के कारण कभी किसी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

भजन गायक हैं पिता

उनके पिता रमजान खान जो कि भजन गायकी के लिए प्रसिद्ध हैं और गो-संरक्षण को बढ़ावा देते हैं। अपने पिता और दो बड़े भाइयों की तरह फिरोज भी गाना पसंद करते हैं। वह हर शनिवार शाम को दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले एक कार्यक्रम में नियमित रूप से संस्कृत में अनुवादित हिंदी फिल्मी गीत गाते हैं।

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