दमदार एक्शन के बावजूद कमजोर पड़ी विद्युत जामवाल-अदा शर्मा की 'कमांडो-3' की कहानी

Updated on: 08 December, 2019 01:23 AM

फिल्म - कमांडो 3/Commando 3
निर्देशक - आदित्य दत्त
स्टारकास्ट - विद्युत जामवाल, गुलशन देवैया,
अदा शर्मा, अंगीरा धर, राजेश तैलंग, सुमीत ठाकुर

रेटेड स्टार : 2.5/5.0

विद्युत जामवाल की मोस्ट अवडेट फिल्म कमांडो-3 आज रिलीज हो गई है। फिल्म रिलीज होते ही दर्शकों पर छा गई है। देश भक्ती पर आधारित इस फिल्म में विद्युत जामवाल, गुलशन देवैया, अदा शर्मा, अंगीरा धर, राजेश तैलंग, सुमीत ठाकुर हैं। 'कमांडो' फ्रेंचाइजी का तीसरा भाग कमांडो-3 में हिंदू-मुस्लिम बगावत, धर्म परिवर्तन, देशभक्ति से आतंकवाद से निपटने की कहानी बताई गई है। 'कमांडो' फ्रेंचाइजी का तीसरा भाग लेकर हाजिर हैं। फिल्म में एक्शन काफी शानदार हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी की शुरुआत में ही चीजों की उलझती जाती हैं जब एक पुलिस ऑफिसर कुछ गुमराह युवाओं का का पीछा करता है। जो बाद में ऐसे एक आंतकी संगठन का लीडर होता है। इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है। और इसके बाद सर्वश्रेष्ठ कमांडो करणवीर सिंह डोगरा (विद्युत जामवाल) और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भावना रेड्डी (अदा शर्मा) की एंट्री होती है। जिसे भारत सरकार चुनती हैं। ताकि लंदन में बैठे बुराक अंसारी (गुलशन देवैया) जो इस आतंकी संगठन का लीडर होता, उसे ढूढ़कर भारत लाया जा सके। बुराक अंसारी अंसारी एक ऐसा एक मास्टरमाइंड है, जो लंदन में बैठकर भी वीडियो टेप के जरीए भारत के युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है। भारत इस बात की भनक लगती है और शांति तरीके से एक्शन लेना शुरू कर देती है।

फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है। करणवीर सिंह डोगरा और भावना रेड्डी लंदन अपना संपर्क बनते हैं। दोनों अपना संपर्क ब्रिटिशन इंटेलिजेंस की मल्लिका सूद (अंगिरा धार) और अरमान (सुमित ठाकुर) से बनाते हैं। अब यहां से शुरु होता है चूहे- बिल्ली का खेल। एक ओर जहां भारतीय एजेंट बुराक को पकड़ना चाहते हैं, वहीं उनकी हर कदम पर पहले से ही बुराक की नजर है। बुराक दिवाली पर एक हमला करने की एक रणनीति बनाता है। अब फिल्म में आगे क्या होता है ये देखने के लिए आपको सिनेमा घरों में जाना पड़ेगा।

फिल्म की खास बातें और कमियां

जैसा की फिल्म को लेकर पहले से कही जा रही थी यह एक एक्शन फिल्म है। जिसमें कई सारी कहानी को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में उन सभी मुद्दों उठाया गया है जिसे लेकर अक्सर सामाजिक, राजनीतिक और वैश्विक स्तर पर बातें की जाती रही हैं। फिल्म की कहानी में वो हर जरुरी बातें बताई गई हैं जिस पर बात करना जरूरी है।

विद्युत के मार्शल आर्ट्स और उनका एक्शन के साथ उनकी एक्टिंग भी दमदार है। विद्युत अपने रोल में एक दम फिट हैं। एक ऑफिसर के रुप में विद्युत सही में ये साबित कर दिया है कि उन्हें टक्कर देना मामुली बात नहीं है। हालांकि एक्शन में माहिर विद्युत हाव भाव में कच्चे हैं। अदा शर्मा ने अंगीरा धार के रोल के साथ न्याय किया है। बुकर अंसारी यानी गुलशन देवैया अपने विलेन रोल काफी क्रूर लगे हालांकि उनके एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी बेहद शानदार है।

अब फिल्म के डायरेक्शन और संगीत की बात करे तो फिल्म की सबसे खास बात इसकी कोरियोग्राफी जो फिल्म देखने के लिए विवश कर देती है। फिल्म की क्लाइमेट और बैकगाउंड म्यूजिक भी दमदार है। हालांकि स्टोरी लेकर यह फिल्म आपको निराश कर सकती हैं। क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ छिड़ी एक मुहिम की कहानी में हिंदू- मुस्लिम बगावत, धर्म परिवर्तन, देश को खत्म कर देने की धमकी, फर्जी पार्सपोर्ट, आतंकवादी और देशभक्ति भी शामिल है लेकिन फिर भी आपको निराश करेगी। क्योंकि फिल्म में कुछ नया नहीं है। मार्क हैमिलटन की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है, वहीं बैकग्राउंड संगीत एक्शन सीन्स में जोश भरता है। हालांकि कहानी अगर कसी हुई होती तो और भी मजेदार होता। आदित्य दत्त की निर्देशन की यह कहानी आपको तक बोर कर देती जब आप कुछ नयापन खोजने की कोशिश कर रहे होते हैं। ढ़ीली पटकथा, बेदम डायलॉग्स आपको बोर करने के लिए काफी है। हालांकि फिल्म क्लाईमैक्स में एक सकारात्मक संदेश देती है, जो आपको कुछ हद तक प्रभावित कर सकती है।

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