बीएचयू के वर्तमान और पूर्व कुलपति सहित छह हाईकोर्ट की अवमानना में तलब

Updated on: 08 April, 2020 09:02 PM

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बीएचयू के कुलपति, पूर्व कुलपति और रजिस्ट्रार सहित छह अधिकारियों पर आदेश की अवमानना का आरोप तय करते हुए सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने इन अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न आदेश की अवमानना के लिए उन्हें दंडित किया जाए। कोर्ट ने सभी अधिकारियों को स्पष्टीकरण के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। यह आदेश न्यायूर्ति सुनीत कुमार ने डॉ. संदीप कुमार व अन्य की अवमानना याचिका पर दिया है। अदालत ने महानिबधक को इस आदेश के अनुपालन के लिए निर्देशित किया है।

मामले के तथ्यों के अनुसार बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में आर्थोपीडिक और एनाटॉमी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया। इस विज्ञापन को में दी गई अहर्ता मानक के अनुरूप नहीं है और उसमें अतिरिक्त अहर्ता जोड़ने को लेकर याचिका दाखिल हुई। कहा गया कि नीति एवं योजना बोर्ड ने अतिरिक्त योग्यता तय की थी, जो विज्ञापन में जोड़ी गई है, जबकि बोर्ड को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ही अतिरिक्त योग्यता जोड़ने का कार्य कर सकती है।

इस पर उच्च न्यायालय ने विज्ञापन रद्द कर दिया और बीएचयू को नए सिरे से विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया। अवमानना याचिका में आरोप है कि इस आदेश के बावजूद बीएचयू ने नियुक्त किए गए एक प्रोफेसर को पद से नहीं हटाया नहीं और न ही कोई नया विज्ञापन जारी किया। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि बीएचयू के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के तीन फरवरी 2014 और 17 फरवरी 2014 के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है। इसके लिए उनके विरुद्ध अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट ने सभी को अवमानना का दोषी करार देते हुए स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। मामले पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

इन्हें जारी हुआ अवमानना का नोटिस

बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह
वर्तमान कुलपति राकेश भटनागर
रजिस्ट्रार डॉ. जीएस यादव
डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अश्वनी कुमार सिंह
कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी
उप कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा

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