गंगा किनारे हिन्दू रीति रिवाज से विदेशी जोड़े ने रचाई शादी, बेटा भी बना साक्षी

Updated on: 05 April, 2020 08:02 AM

वाराणसी में गंगा किनारे गुरुवार को विदेशी जोड़े ने हिन्दू रीति रिवाज से शादी कर सात जन्मों के बंधन में बंध गए। करीब तीन घंटे चले वैवाहिक कार्यक्रम में वह सभी रीति रिवाजों को अपनाया गया जो आम हिन्दू शादियों में अपनाए जाते हैं। भारतीय जोड़ों की तरह फ्रांस की मारिन और रेयूनियां के लोद्रिया ने पोशाकें भी पहन रखी थीं। दुल्हन ने चुनरी के साथ लाल साड़ी और दूल्हे ने चूड़ीदार पैजामा के साथ कुर्ता और सिर पर पारंपरिक टोपी लगाकर सात फेरे लिये। शादी की शुरुआत भी दुल्हन के ताक पात से होते हुए सिंदूर दान, फेरे और कन्यादान तक पहुंचा।

रेयूनियां और मारिन लंबे समय से साथ रह रहे थे। दोनों को 14 महीने का एक बेटा भी है। वाराणसी के शिवाला में गंगा किनारे स्थित सूर्योदय हवेली में काशी के पंडित अनिल चतुर्वेदी ने मंत्रोच्चार के बीच शादी की रस्में पूरी कराईं। लोद्रियाँ ने बताया कि 5 सालों से वे मारिन के साथ प्रेम संबंध में हैं। इससे पहले दोनों लगभग 5 बार भारत आ चुके हैं। लेकिन काशी में घूमने आए तो यहां की सभ्यता संस्कृति और यहां का अंदाज काफी पसंद आया। तभी से दोनों ने काशी में विवाह करने की योजना बनाई थी।

लोद्रियाँ अफ्रीकी द्वीप रेयूनियाँ के रहने वाले हैं। यहां काफी संख्या में भारतीय रहते हैं और काली के साथ शिव के भक्त हैं। वहां के भारतीयों के अंदर भक्ति भाव देखने के बाद जब वो भारत आये तो यहां की संस्कृति ने उनका मन मोह लिया। खासकर काशी में आकर वो काफी प्रभावित हुए और फिर यहीं पर शादी करने का फैसला कर लिया।

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