जाड़े की बारिश से कांपा पूर्वांचल, वाराणसी में बन गया नया रिकार्ड

Updated on: 08 April, 2020 09:39 PM

वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार-शुक्रवार की बारिश ने विगत दस वर्षों के दौरान एक ही दिन में सर्वाधिक बारिश का रिकार्ड बना दिया। एक ही दिन में 17.4 मिमी पानी बरस गया। पिछले दस सालों में दिसंबर में इतनी बरसात कभी नहीं हुई। हिंदी महीनों के मुताबिक अगहन-पूस (अमूमन दिसंबर) में बारिश की संभावना रहती है। गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह सूरज चढ़ने तक बादलों की मेहरबानी लोगों के लिए आश्चर्यजनक रही। चमक और गरज के साथ खूब बारिश हुई।

पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन से बने माहौल ने पूर्वांचल में कंपकंपी पैदा कर दी है। बारिश से तापमान में काफी कमी आई। सर्द हवा ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। गुरुवार को अधिकतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस था, जो शुक्रवार को घटकर 18.5 हो गया। अर्थात 5 डिग्री सेल्सियस में कमी आई। इससे गलन बढ़ गई है।

बारिश का क्रम गुरुवार की रात नौ बजे से आरंभ हो गया, जो रुक-रुक कर शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे तक जारी रहा। न्यूनतम तापमान में वृद्धि हुई है। न्यूनतम तापमान 12.6 से बढ़कर 15.4 डिग्री सेल्सियस हो गया। आद्रर्ता 88 फीसदी रही। पश्चिमी विक्षोभ के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार तक ट्रफ बन गया था। इसकी वजह से खूब बारिश हुई। अमूमन दिसंबर में इतनी बारिश नहीं होती है। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय का कहना है कि शनिवार तक इसका असर रहेगा। आकाश में बादल छाए रहेंगे।

आम तौर दिसंबर का अधिकतम तापमान 25.2 और न्यूनतम 10.2 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। मगर बारिश और सर्द हवा के कारण दिन का तापमान औसत से सात डिग्री कम होकर 18. 5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। चौबीस घंटे के भीतर तापमान में आई इतनी कमी ने सिहरन बढ़ा दी। लोगों को ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों की संख्या बढ़ानी पड़ी। बारिश से बचने के लिए रेनकोट का सहारा भी लेना पड़ा।

सुबह 10 से 11 बजे के बीच तेज बारिश हुई। आम तौर पर यह दफ्तर जाने का होता है। अधिकतर लोग भीगते हुए आफिस पहुंचे। जिन लोगों ने विंडचीटर और और रेनकोट का सहारा लिया था, उनका तो कुछ बचाव हो गया। अन्य लोगों के स्वेटर, कोट आदि भीग गए। कई लोग बारिश से बचने के लिए रास्ते में स्कूटर और बाइक रोक कर खड़े हो गए थे। बारिश धीमी होने पर ही निकले।

बारिश का असर पढ़ाई पर भी पड़ा। माध्यमिक स्कूलों में उपस्थिति 50 फीसदी से कम रही। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में लगभग सन्नाटा पसरा हुआ था। कक्षाओं में छात्र दिखाई नहीं दे रहे थे। अभिभावकों ने मौसम के मिजाज को देखते हुए छोटे बच्चों को स्कूल भेजा ही नहीं। बरसात की वजह से कई रास्तों पर आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ी। सिगरा-महमूरगंज मार्ग पर खुदाई के कारण निकली मिट्टी चारों तरफ बिखर गई थी और कीचड़ फैल गया था। यहीं पर भूसे से लदी एक ट्रक गड्ढे में फंस गई, जिससे काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। महमूरगंज में फ्लाईओवर की बाई तरफ की सड़क जगह-जगह गड्ढों में पानी भर गया था। इसी तरह की स्थित नगर के कई अन्य इलाकों की रही।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 से 2018 तक दिसंबर में बारिश हुई नहीं। इससे पहले 2014 और 2015 में नाम मात्र की बारिश हुई थी। 2010 से 2013 तक भी पानी नहीं बरसा था। 2009 में 1.6 मिमी बारिश हुई थी। दिसंबर में बारिश का रिकार्ड 1997 का है। उस वर्ष एक दिसंबर को 41 मिमी बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकार्ड है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण अक्सर जनवरी में बारिश होती है। पूर्वांचल के सभी जिलों सोनभद्र, बलिया, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही और चंदौली में भी बारिश का क्रम जारी रहने से ठंड में तगड़ा इजाफा हो गया है।

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