डिटेंशन सेंटर से लेकर NRC-NPR बवाल पर अमित शाह ने क्या कहा

Updated on: 01 April, 2020 12:51 PM

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर देश भर में मचे बवाल के बीच केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि एनआरसी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में कोई संबंध नहीं है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर कैबिनेट मुहर के बाद मंगलवार (24 दिसंबर) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तमाम संशय दूर किए। उन्होंने कहा कि एनपीआर से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। इसका एनआरसी से भी दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं। उन्होंने साफ किया कि देशभर में एनआरसी लागू करने पर अभी कोई चर्चा नहीं की गई है। तो चलिए जानते हैं अमित शाह ने डिटेंशन सेंटर से लेकर एनपीआर और एनआरसी को लेकर क्या-क्या कहा...

प्रधानमंत्री ने सही कहा था.. : समाचार एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था कि एनआरसी पर कैबिनेट और संसद में कोई चर्चा नहीं हुई है। अगर एनआरसी लागू किया जाएगा तो चोरी-छिपे थोड़े ही किया जाएगा। जहां तक पार्टी के घोषणापत्र की बात है, तो संसद में चर्चा होना और पार्टी के घोषणापत्र में शामिल होने अलग-अलग बात हैं।

एनपीआर और एनआरसी के अंतर को समझाया: गृहमंत्री ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी के बीच मूलभूत अंतर है। एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग सरकारी योजनाएं बनती हैं। लेकिन, एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता पंजी) में हर व्यक्ति से दस्तावेज मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारतके नागरिक हैं। एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। अगर कोई जानकारी मौजूद नहीं है तो कोई बात नहीं। हां, इसमें आधार कार्ड की जानकारी देने का प्रावधान है। किसी के पास आधार है तो नंबर देने में हर्ज क्या है। एनपीआर का कोई डेटा एनआरसी के प्रयोग में आ ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अगर किसी का नाम एनपीआर से गायब है, तो भी उसकी नागरिकता को खतरा नहीं होगा।

डिटेंशन सेंटर शरणार्थियों के लिए नहीं : अमित शाह
गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार (24 दिसंबर) को एक साक्षात्कार में कहा कि डिटेंशन सेंटर शरणार्थियों के लिए नहीं है। इसमें घुसपैठियों को रखा जाएगा। ऐसी व्यवस्था दूसरे देशों में भी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरे देश से गैर कानूनी तरीके से आ जाता है, तो उसको जेल में नहीं रखा जाता है, उसको डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। डिटेंशन सेंटर का एनआरसी से कोई लेना देना नहीं हैं।

असम में एक डिटेंशन सेंटर : अमित शाह ने कहा कि असम में सिर्फ एक डिटेंशन सेंटर है। हालांकि इसको लेकर मैं कंफर्म नहीं हूं, लेकिन इतना साफ कर देता हूं कि जो भी डिटेंशन सेंटर हैं, वो मोदी सरकार में नहीं बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, जो डिटेंशन सेंटर बने भी हैं, वो संचालित नहीं हैं।

कांग्रेस ने शुरू की थी प्रक्रिया
गृहमंत्री ने कहा, यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और ये भाजपा सरकार ने शुरू नहीं की। यूपीए सरकार ने 2004 में एक कानून बनाया व 2010 की जनगणना के साथ एनपीआर सर्वे हुआ। इस बार फिर जनगणना के साथ एनपीआर की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा, बंगाल और केरल की सरकारों से आग्रह करुंगा एनपीआर का विरोध कर कोई ऐसा कदम न उठाएं जिनसे दिक्कतें पैदा हों।

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