सुप्रीम कोर्ट बोला- केंद्र को बिना सुने हम नागरिकता कानून पर रोक नहीं लगाएंगे

Updated on: 06 July, 2020 10:55 AM

देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ और समर्थन में दायर कुल 144 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। इनमें एक याचिका केंद्र सरकार ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को संविधान की मूल भावना के खिलाफ और विभाजनकारी बताते हुए रद्द करने का आग्रह किया है। ज्यादातर याचिकाओं में नागरिकता संशोधन कानून की वैधता को चुनौती दी गई है, वहीं कुछ याचिकाओं में इस कानून को संवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षतता वाली तीन सदस्यी पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।


याचिकाओं पर जवाब देने के लिए समय चाहिए- केंद्र

केंद्र सरकार ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए उसे समय चाहिए जो उसे अभी नहीं मिल पाई हैं ।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय से सीएए के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और एनपीआर की कवायद फिलहाल टाल देने का अनुरोध किया ।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार से कुछ अस्थायी परमिट जारी करने के लिए कह सकते हैं। इसके बाद अटार्नी जरनल ने अदालत से कहा कोर्ट में 140 याचिकाएं दायर हैं। कोर्ट अब और पिटिशन दाखिल करने की इजाजत नहीं दे। अन्य जो सुनवाई की इच्छा रखते हैं, वे इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल कर सकते हैं।

न्यायालय ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता तय करने के लिए वह अपीलों को वृहद संविधान पीठ के पास भेज सकता है ।

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 143 याचिकाओं में से करीब 60 की प्रतियां सरकार को दी गई हैं ।

नागरिकता संशोधन कानून पर सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल वीके वेनुगोपाल ने कहा कि केंद्र ने एक प्रारंभिक हलफनामा तैयार किया है जो आज दायर किया जाएगा। इस पर एएम सिंघवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, यह अपरिवर्तनीय है क्योंकि एक बार नागरिकता प्रदान करने के बाद इसे वापस नहीं लिया जा सकता है।

नागरिकता कानून को लेकर अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। कपिल सिब्बल ने कोर्ट से इस मामले को संविधान पीठ में भेजने पर विचार करने को कहा है।

अटॉर्नी जनरल ने सीजेआई एसए बोबडे से कहा कि इस अदालत को कुछ निर्देश जारी करना है कि कौन अदालत में आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट रूम के अंदर आने वाले लोगों के लिए नियम हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने CJI कोर्ट में भीड़ के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि माहौल शांतिपूर्ण और शांत होना चाहिए, खासकर सुप्रीम कोर्ट में।

उच्चतम न्यायालय में बुधवार को शाहीन बाग मामले पर भी सुनवाई हो सकती है। सीएए कानून के खिलाफ सैकड़ों लोग एक महीने से भी ज्यादा समय से सड़क पर धरना दे रहे हैं। इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धरने की वजह से नोएडा और दिल्ली के लोगों को परेशानी हो रही है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और इंडियन मुस्लिम लीग समेत कई लोगों और संगठनों ने यचिका दायर की हैं। हालांकि, इसमें एक याचिका केंद्र की भी है। ज्यादातर याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून भारत के पड़ोसी देशों से हिंदू, बौद्ध, ईसाई, पारसी, सिख और जैन समुदाय के सताए हुए लोगों को नागरिकता देने की बात करता है, लेकिन इसमें जानबूझकर मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है। संविधान इस तरह के भेदभाव करने की इजाजत नहीं देता।

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर तथा जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय पीठ ने नौ जनवरी को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अदालत ने नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि याचिकाओं पर तभी सुनवाई होगी जब हिंसक घटनाएं बंद हो जाएगी।

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