IIT BHU में टेक्नेक्स शुक्रवार से, दुनिया की पहली ह्यूमनाइड रोबोट सोफिया होगी आकर्षण का केंद्र

Updated on: 15 July, 2020 01:37 AM

आईआईटी बीएचयू में तकनीकी उत्सव टेक्नेक्स-2020 शुक्रवार 14 फरवरी से शुरू हो रहा है। इसे यादगार बनाने के लिए आआईटी के छात्र दिन-रात एक किए हुए हैं। इस बार के टेक्नेक्स का खास आकर्षण विश्व की पहली ह्यूमनाइड रोबोट नागरिक सोफिया है। इसके अलावा प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल धमाल मचाएंगे। प्रसिद्ध कॉमेडियन निशांत सूरी अपने स्टैंडअप कॉमेडी से गुदगुदाएंगे। इसके साथ ही नवीनतम तकनीक से विज्ञान के छात्रों को परिचित कराने के लिए विज्ञान प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। प्रमुख प्रदर्शनियों में भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 एमकेआई, डीरेका डब्लूएजीसी-3 (दुनिया का पहला रुपांतरण लोकोमोटिव), कलाम एसएटी (सूक्ष्म उपग्रह), देश का सबसे लंबा छह फीट ह्यूमोनाइड रोबोट शामिल है।

यह होते हैं ह्यूमनॉइड रोबोट
ह्यूमनॉइड एक तरह के रोबोट हैं, जो इंसान की तरह चल-फिर सकते हैं और मानवीय हाव-भाव भी समझ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग के जरिए ह्यूमनॉइड सवालों के जवाब भी दे सकते हैं। ह्यूमनॉइड के दो खास हिस्से होते हैं, जो उन्हें इंसान की तरह प्रतिक्रिया देने और चलने फिरने में मदद करते हैं। ये दो हिस्से हैं-सेंसर्स और एक्च्यूएटर्स।

सेंसर की मदद से ह्यूमनॉइड अपने आस-पास के वातावरण को समझते हैं। कैमरा, स्पीकर और माइक्रोफोन जैसे उपकरण सेंसर्स से ही नियंत्रित होते हैं। ह्यूमनॉइड इनकी मदद से देखने, बोलने और सुनने का काम करते हैं। इसमें खास तरह की मोटर एक्च्यूएटर का लगी होती है, जो ह्यूमनॉइड को इंसान की तरह चलने और हाथ-पैरों का संचालन करने में मदद करती है। सामान्य रोबोट की तुलना में एक्च्यूएटर्स की मदद से ह्यूमनॉइड विशेष तरह के एक्शन कर सकते हैं।

ह्यूमनॉइड्स का इस्तेमाल पहले केवल शोध के लिए किया जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से इन्हें इंसान के सहायक के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। दुनिया में सोफिया, कोडोमोरॉइड और जिया-जिया काफी प्रसिद्ध ह्यूमनॉइड हैं। रोचक बात यह है कि तीनों ह्यूमनॉइड्स महिला की तरह बनाई गई हैं।

सोफिया सबसे प्रसिद्ध ह्यूमनॉइड है और दुनिया की पहली रोबोट नागरिक है। 11 अक्टूबर 2017 को संयुक्त राष्ट्र में इसका परिचय कराया गया था। 25 अक्टूबर को इसे सऊदी अरब की नागरिकता मिली। 2019 में यह भारत भी पहुंची थी और इंदौर में इसने लोगों के सवालों के जवाब दिए थे।

कोडोमोरॉइड जापान में बनाई गई ह्यूमनॉइड है। यह टेलीविजन पर प्रस्तुति देती है। उसका नाम जापानी शब्द कोडोमो यानी बच्चा और गूगल के एंड्रॉइड से मिलकर बना है। कोडोमोरॉइड कई भाषाएं बोल सकती है। वह समाचार पढ़ने और मौसम की जानकारी देने में सक्षम है।

जिया जिया ह्यूमनॉइड चीन में बनाई गई है। इसे दुनिया के सामने लाने से पहले चीन की साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में इसका 3 साल तक परीक्षण किया गया। यह बातचीत करने में सक्षम है, लेकिन इसका मूवनेंट और भावनाएं सीमित हैं। आविष्कारक इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


टेक्नेक्स में कई प्रतियोगिताएं भी होंगी
हर साल टेक्नेक्स विभिन्न तकनीकी और प्रबंधन प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है। टेक्नेक्स में देशभर के 400 कॉलेजों के 20 हजार से अधिक छात्र भाग लेंगे। इसके माध्यम से विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राएं अपने अभिनव कौशल का प्रदर्शन करते हैं। प्रतियोगिताओं में एस्केशन (ला ट्रेजेक्ट्री, मोमेंटम, डी ऑरग्लिसुर और ड्रोन टेक), पहल (एन्किविस्टा, इंडस्ट्रियल एनिग्मा, एसएचई, पेपर गैपर और एक्सप्लिका-2डे), बाइट द बिट्स (एपाथॉन, इंटरनेशल कोडिंग मैराथन, एमलवेयर और हैकाउट), एक्सट्रीम इंजीनियरिंग (एक्सिलरेट, गोल्डबर्ग्स एले. हाइड्रैक्स एंड ब्रिज इट), रोबोनेक्स (पिक्सलेट, मेज एक्सप्लोरर, हर्डल मेनिया और रोबोवार), रिक्वेजा (केस ए थॉन, एनलिसिटी, कॉटीट्यूड और बुल्स ऑन द फ्लोर), मोडेक्स (प्रोटोटाइप बनाना), सुपरनोवा (खगोल प्रश्नोत्तरी, इंटरस्टेलर की खोज, पेपर प्रजेंटेशन, एस्ट्रोफोटोग्राफी) शामिल हैं।

प्रेरणादायक वार्ताएं प्रमुख आकर्षण होंगी
टेक्नेक्स-2020 के तैयारियों की जानकारी मीडिया से साझा करते हुए निदेशक प्रो. पीके जैन और समन्वक तन्मय ने बताया कि टेक्नेक्स में इस बार अजय चौधरी (एचसीएल के सह संस्थापक), एलन एमिट (पहले सर्च इंजन आर्ची के निर्माता), कैथरीन गन (जिन्होंने इराक हमले के पीछे अमेरिका और ब्रिटेन के झूठ को सामने लाया), डॉ. डिडिएर पैट्रिक क्वेलोज (भौतिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार विजेता और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश अरिजीत पसायत का टॉक शो खास आकर्षण होंगे। वे अपने अनुभव साझा करेंगे।

रक्षा क्षेत्र की निजी कंपनियों के साथ बढ़ेगा सहयोग
आईआईटी के निदेशक प्रो. जैन ने बताया कि लखनऊ के डिफेंस एक्सपो में संस्थान का स्टाल लगा था। रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली कई निजी कंपनियों ने काफी रुचि दिखाई है। उनमे से कुछ के साथ बातचीत चल रही है। उम्मीद है भविष्य में और भी सहयोग बढ़ेगा।

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