इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर नम्बर से रहें सावधान, क्विक सपोर्ट एप डाउनलोड करा कर हड़पते हैं रुपए

Updated on: 12 August, 2020 12:09 PM

ऑनलाइन शापिंग करने वाले साइबर ठगों का आसान शिकार बन रहे हैं। जालसाजों ने गूगल पर कम्पनियों के नाम से बनाई गई फर्जी कस्टमर केयर नम्बर डाल रखे हैं। जिन पर मदद के लिये कॉल करने वाले लोगों के मोबाइल पर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड करा कर ठगी की जा रही है। कोविड-19 के दौरान ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

विभूतिखण्ड निवासी अंकिता ने ओएलएक्स पर पुराना फर्नीचर बेचने के लिये पोस्ट डाली थी। उनकी पोस्ट देख कर सैन्यकर्मी बन युवक ने फोन किया था। सौदा तय कर अंकिता के खाते में रुपये भेजने की बात कही। फिर लिंक भेज कर खाते से 25 हजार रुपये निकाल लिये। इसी तरह इन्दिरानगर निवासी विश्वामित्र मौर्या ने जोमैटो से आर्डर बुक कराया था। खाना खराब होने पर उन्होंने रिर्टन लेने के लिये गूगल पर कस्टमर केयर नम्बर सर्च किया। ठगों ने उन्हें बातों में उलझा कर खाते से दस हजार रुपये निकाल लिये।

इस तरीके से करते हैं ठगी
साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा बताते हैं कि ठग इंटरनेट पर मौजूद यैलोपेज वेबसाइट पर कम्पनी के कस्टमर केयर की जगह अपना नम्बर अपलोड करते हैं। फिर सर्च इंजन ऑपटिमाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल कर लगातार चिह्नित कम्पनी के कस्टमर केयर नम्बर को सर्च किया जाता है। जिससे ठगों का बनाया कस्टमर केयर नम्बर गूगल के पहले पेज पर दिखने लगता है।

बातों में उलझा कर लोड कराते हैं एप
ई-वॉलेट से रुपये निकालने के लिये ठग पीड़ित के मोबाइल पर एक रिक्वेस्ट भेजते हैं। साइबर विशेषज्ञ के अनुसार खाते में रुपये मंगाने के लिये ई-वॉलेट में पिन नहीं डालना होता है। वहीं, ठग बातों में उलझा कर भेजे गये लिंक को खोलने के साथ पिन डालने को कहते हैं। इसी तरह खाते से रुपये निकालने के लिये ठग क्विक सपोर्ट एप डाउनलोड कराते हैं। यह रिमोट एक्सेस एप होती है। जिसे डाउनलोड कर कुछ परमिशन देने के बाद फोन पर ठग नियंत्रण कर खाते से रुपये निकाल लेते हैं।

ध्यान रखें ये बातें
1- फोन पर किसी को बैंक डिटेल न दें
2- यूपीआई का पिन किसी को न बतायें
3- वेबसाइट पर बना लॉक (एचटीटीपी) का साइन अवश्य देखें
4- रिटर्न के लिये एप में दिये गये कस्टमर केयर नम्बर का इस्तेमाल करें
5- रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड न करें

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