सुशांत सिंह राजपूत के फैमली वकील का दावा, मुंबई पुलिस कर रही है रिया चक्रवर्ती की मदद

Updated on: 12 August, 2020 11:41 AM

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में हर दिन नये खुलासे हो रहे है। हाल ही में सुशांत के पिता की तरफ से करायी गयी एफआईआर के बाद बिहार पुलिस की तुरंत शुरू की गयी कार्रवाई ने इस मामले में नयी बहस छेड़ दी है। इसी बीच सुशांत के परिवार के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती द्वारा पटना में दर्ज प्राथमिकी के स्थानांतरण के लिये शीर्ष अदालत में याचिका दायर करने से संकेत मिलता है कि मुंबई पुलिस में कोई उनकी मदद कर रहा है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में विकास सिंह ने कहा कि रिया अभी तक सुशांत मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही थीं लेकिन अब उन्होंने पटना में दर्ज मामले की जांच पर रोक लगाने का अनुरोध शीर्ष अदालत से किया है। सिंह ने कहा, अगर उन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है तो उन्हें सीबीआई जांच के लिये याचिका दायर करनी चाहिए थी। उन्होने कहा कि यह प्राथमिकी पटना में दर्ज हुयी है और अब उन्होंने (रिया ने) उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाने और इस मामले को मुंबई स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। इससे ज्यादा क्या सबूत चाहिए कि मुंबई पुलिस में कोई उनकी मदद कर रहा है।

34 वर्षीय सुशांत का शव मुंबई के उपनगर बांद्रा में 14 जून को अपने अपार्टमेन्ट में छत से लटका मिला था। इसके बाद से ही मुंबई पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रख कर इस मामले की जांच कर रही है। रिया चक्रवर्ती द्वारा शीर्ष अदालत में याचिका दायर करना महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार पुलिस का चार सदस्यीय दल पहले से ही मुंबई में है और सुशांत के पिता के के सिंह द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी के सिलसिले में उनसे पूछताछ की जा सकती है। इस प्राथमिकी में आत्महत्या के लिए उकसाने और विश्वास भंग करने सहित अनेक अपराधों के आरोप लगाये गये हैं।

वहीं इस मामले में रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिन्दे ने बताया कि उन्होंने यह याचिका दायर की है और पटना में दर्ज मामला मुंबई स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है जहां पहले से ही सुशांत राजपूत की मौत के मामले की जांच चल रही है। रिया ने अपनी याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत में लंबित उनके मामले का निबटारा होने तक सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में बिहार पुलिस की जांच पर रोक लगायी जाये।

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